दर्दे हालात के भँवर से डर गए होते,
आपका साथ न मिलता तो मर गए होते
आपके जैसा हंसी चेहरा कभी ना देखा,
आज जो देखा तो समझा की चाँद झूठा है,
मैंने जब से हंसी कहा तुमको ,
तबसे मुझसे भी चाँद रूठा है
चाँद से मैंने कहा इस सच को देख लेते तुम,
जो साथ मेरे अगर उसके घर गए होते
कभी ना सोचा था कि आपसे मिलेंगे यूँ,
मगर हालात पे किसका जोर चलता है,
वक़्त ने हमको जब मिला ही दिया,
फिर ज़माना क्यों हमसे से जलता है,
यही कहा मैंने चाहत से अगर तुम ना होते,
तो हम ना जाने इस हालत मै किधर गए होते
और बहुत से है ग़म ज़माने मे,
जिसको चुपचाप से हम सहते है,
एक बड़ा ग़म, कभी ना ये आये,
लोग जिसको जुदाई कहते है,
अगर लिखा होता ये ग़म हमारी किस्मत मे,
तब तो यारों हम कभी के मर गए होते
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