अनजानी राहो के हम अनजाने राही,
चलते जा रहे यूँ कहीं,
हर पल से है बेखबर, ना कोई चिंता, ना कोई डर,
चलना है ऐसे हमको अभी…..
सर पे धूप है तो क्या, दिल में बुलंद है होसलें,
यूँ ही बढ़ते जायेंगे मिटा देंगे हर दिल के फासले
कहती है ये ज़मीं, कहता है आसमां
रुकना नहीं चलते जाना, ऐसे ही……
रास्ता कठिन है तो क्या, इरादे नहीं फ़िज़ूल है,
रुकना आता नहीं, अपना ये उसूल है
ठोकर लगने से ही उठता है हर इंसां,
रुकना नहीं चलते जाना, ऐसे ही……
आगे हो आंधी तो क्या, मन में भी एक तूफ़ान है,
सुख दुःख में चलता जाए, वो सच्चा इंसान है
छोडो बेकार की बातें मानो मन का कहना ,
रुकना नहीं चलते जाना, ऐसे ही……
Photo by Sharefaith from Pexels

