Patriotic Poem Song

Are We Independent?

Written by Gaurav

“देश और आज़ादी ……”
क्या हम अभी भी सही मायनो में आज़ाद है ? एक सोच आपके सामने रखते हुए ये उम्मीद करता हूँ कि शायद आप भी इससे सहमत हो और भारत की अखंडता एवं इसकी वर्चस्वता को बरक़रार रखने के लिए स्वयं भी प्रतिबध्य रहे !

कल का सूरज क्या पता कब आये, रात का अँधियारा बढ़ता जाए,
वक़्त भी जाने क्यों थमने सा लगा, एक बंधी सी आस टूटी जाए
कहने को हम यहाँ, हैं खुले पर कहाँ, उड़ने से रोकती, पैरों की बेड़ियाँ
लाशों पर चल रही राजनीति यहाँ, हो ना जाए कहीं सब्र की इन्तेहाँ
सोच ये मन बांवरा घबराए, एक बंधी सी आस टूटी जाए

बेवजह ज़िन्दगी, पूछ बैठी अभी, क्या यही कारवां, है तेरे बाद भी
चाहते कुछ कहें, होंठ पर सिल दिए, तोड़ते जा रहे दम यहाँ होंसले
इस डगर पर कुछ नज़र ना आये, एक बंधी सी आस टूटी जाए
हर तरफ शोर है, फिर भी कमज़ोर है, उसको रोके हुए भी कई जोर है
ये वही लोग है, देश जो खा रहे, साधू दिखते मगर ये सभी चोर है
दर्द क्या इनको समझ ना आये, एक बंधी सी आस टूटी जाए

सोच लो फिर अभी, क्या यही ज़िन्दगी, जिसकी मंजिल नहीं, तुमने सोची हुयी ?
आनेवाला ये कल, किस तरफ जायेगा, इस तरह गर हुआ, देश बट जाएगा
क्यों नहीं कुछ आज हम कर जाए, उठ खड़ा हो साथ, क्यों घबराए

तेरी कोशिश यही, रंग भर लाएगी, दूर होंगे अँधेरे, सुबह आएगी
एक नयी सोच हो, फिर नया जोश हो, ये गुलामी की बेड़ी भी कट जायेगी
कल का सूरज, रोशनी वो लाये, एक नया भारत उभरता जाए
दूर हो दिल की सब कडुवाहटें, आशा की ये लौ ना बुझने पाए

Photo by Amrutha VM from Pexels

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About the author

Gaurav

मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें, तुम अच्छा सोचते तो ऐसा लिखती, तुम और भी अच्छा सोचते तो मै वैसा लिखती. तुम इस बात को ऐसे कहते, तुम उस बात को वैसे कहते.... मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें....

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