Poem Song

A Beautiful Morning

Written by Gaurav

“कभी कभी हम बहक कर गलत रास्तों पर चल देंते है और जब होश आता है तब पछताते है और ये सोच बैठते है की अब तो बहुत देर हो चुकी है, अब यहाँ से लौटना मुश्किल है , लेकिन कहते है कि ‘जब जागो तभी सवेरा’ | सभी लोग अपनी अपनी परेशानियों में उलझे हुए है, कोई खुद के हालात पर तो कोई देश के, हर एक को आस लगी है तो बस एक ‘नयी सुबह’ की, जब उनकी ये सारी परेशानिया दूर हो जाये | ये नयी सुबह कुछ और नहीं बल्कि उन्ही के भीतर की एक सोच है जो यह दिखाना चाहती है कि मै कमज़ोर नहीं हूँ, मै लड़ रहा हूँ, तैयार हो रहा हूँ उस आने वाले कल से दो दो हाथ करने के लिए | अभी देर नहीं हुयी है, जिसे तुम अँधेरा समझ रहे हो वो बस जाने ही वाला है, कुछ ही देर मै ‘नयी सुबह’ हो जाएगी, मै अकेला नही रहूँगा, धूप कि वो जादुई किरणे मेरी परछाईं के रूप में मुझे मेरा नया दोस्त दे देंगी…”

नई नई सुबह, खिली खिली रोशनी,
जाने क्या मेरे कानो में मुझसे है कह रही,
मौसम ने जादू कर दिया,मुझको बेकाबू कर दिया,
मै सो गई या खो गई…

फूलों में कैसी है खुशबू, कहती है रंगी तितलियाँ,
लगता है इनका झगड़ा शायद भौरों से हो गया
चहका चहका उपवन, महका महका ये मन,
क्यों मुझे दीवाना कर गया, मै सो गई या खो गई…

बारिश की मीठी बूँदें, पत्तों पर जो पड़े,
लगता है देख के ऐसे जैसे वो बातें करें
गीली गीली मिटटी की बारिश में खुशबू सोंधी,
देखो अफसाना बन गया, मै सो गई या खो गई…

चारों तरफ हरियाली, झूमे पत्तों संग डाली,
हवा में घुली है ठंडक, फैली हुयी खुशहाली ||
धरती से आसमां संग, बिखरे इन्द्र धनुषी रंग,
पल ये मस्ताना कर गया, मै सो गई या खो गई…

Photo by Debadutta from Pexels

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About the author

Gaurav

मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें, तुम अच्छा सोचते तो ऐसा लिखती, तुम और भी अच्छा सोचते तो मै वैसा लिखती. तुम इस बात को ऐसे कहते, तुम उस बात को वैसे कहते.... मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें....

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