रात की चांदनी में सिमटी हुयी,
वो कली थी कोई खिली हुयी,
जिसको भंवरे का इंतज़ार था,
उस कली को किसी से प्यार था
मैंने आँखों में उसकी देखा जब,
एक गहराई सी नज़र आई,
उसके दिल में थी क्या तमन्नाएँ,
मेरी नज़रों में वो उतर आई
देखने से पता चला मुझको,
उसे ना चैन ना करार था,
वो कली थी कोई खिली हुयी,
जिसको भंवरें का इंतज़ार था
चांदनी रात में तारे भी जगमगाते थे,
बहते पानी में वो धुंधले से नज़र आते थे,
मगर यूँ देखना उनको तभी मुनासिब था,
उस हंसी चेहरे से अपनी नज़र हटा लेते
समझ ना आये मुझे कैसे भूल जाऊं उसे,
जो मेरी ज़िन्दगी का प्यार था,
वो कली थी कोई खिली हुयी,
जिसको भंवरें का इंतज़ार था

