Poem Song

My Shadow

Written by Gaurav

“कहते है कि बुरे वक़्त में परछाईं भी आपका साथ छोड देती है लेकिन अगर हौसला हो तो उसके तेज़ से फिर एक नयी परछाईं उभर आती है | यहाँ ‘परछाईं’ का एक और अर्थ भी है ‘किसी के जैसा बनना’ | अगर तुम भी ज़िन्दगी में कुछ अच्छा करना चाहते हो तो सबसे पहले एक अच्छा इंसान बनना सीखो यानी एक अच्छे इंसान की ‘परछाईं’ | अगर तुम्हारे व्यक्तित्व में तेज़ रहेगा तो कोई भी तुम्हारी परछाईं को मिटा नहीं पायेगा | याद रखना कि तुम कभी अकेले नही हो अगर ज्ञान का प्रकाश तुम्हारे पास है तो तुम्हारे साथ तुम्हारे जैसे कई और लोगों कि परछाईं होगी, जो हर एक कदम के साथ ही अज्ञानता के अंधेरों को ख़त्म करती जाएगी”

धूप की परछाईयो में मेरी भी परछाई है,
कब बनी कब मिट गयी मुझको कुछ भी पता नहीं है

सुबह का निकला, घर से अकेला, मजिल का कुछ नहीं ठिकाना,
आज यहाँ है, कल ना जाने, होगी कहाँ ये, कोई ना जाना
मुश्किल डगर है, लम्बा सफ़र है, रुकने का सोचा नहीं,
चलना संभलकर, गिरने का है डर, लेकिन फिर भी चलना अभी

बारिश की एक बूँद है जीवन, सागर से कब जा मिली है,
कब बनी कब मिट गयी मुझको कुछ भी पता नहीं है

सुख: दुःख: जीवन के दो पहलू, आते है और जाते हैं,
सुख हमको खुशियाँ देता, ग़म आके हमें रुलाते है
दुःख लगता एक कठिन घड़ी, सुख कब बीता कुछ पता नहीं,
जो दुःख हंसकर झेल ले सारे, उससे बढ़कर कोई नहीं

जो है समझता इन बातों को उनके लिए कुछ नया नहीं है,
कब बनी कब मिट गयी मुझको कुछ भी पता नहीं है

Photo by Nadi Lindsay from Pexels

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About the author

Gaurav

मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें, तुम अच्छा सोचते तो ऐसा लिखती, तुम और भी अच्छा सोचते तो मै वैसा लिखती. तुम इस बात को ऐसे कहते, तुम उस बात को वैसे कहते.... मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें....

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