ऐ काश कभी ऐसा भी तो हो, तुम दूर नहीं बस पास रहो,
जो कहना है तुमसे मै कहूँ, और किसी को कुछ आभास ना हो
हरियाली चारों और हो बस, बारिश की हलकी बूँद गिरें,
हवा का झोंका आता रहे, हम दोनों फिर भी बात करें,
बस प्यार ही प्यार का आलम हो, ग़म का तो कभी एहसास ना हो
जब साथ चले खुशबू तेरी, मेरे मन में हलचल कर जाए,
नाचे जंगल में मोर तभी, सावन की घटा जब चढ़ जाए
दोनों में प्यार हो इतना की, किसी और चीज़ की प्यास ना हो
तेरे दिल में भी मेरे प्यार की, तेज़ी से एक एक लहर उठे,
तुम कह दो दिल की बातें सब, और हम भी तुमसे खुल के कहे
बस हो खुशियाँ दामन में तेरी, दुःख कभी तुम्हारे पास ना हो

