Poem Sad Song

Lost

Written by Gaurav

“प्यार में उम्मीदों से परे जब हमें कुछ नहीं मिलता तो हम सब कुछ भूलकर स्वार्थी बन जाते है | सिर्फ उसी क्षण भर के प्यार के लिए अपना परिवार, अपना जहां सभी को छोड़कर चल देते है और पीछे छोड जाते है तो सिर्फ यादें और आंसू, अपनों की आँखों में जो उम्र भर तक सिर्फ इंतज़ार करते रहते है तुम्हारे लौटने का और पूछते रहते है हर एक से कि आखिर ‘तुम गए कहाँ’ ?”

मैंने सब से पूछ लिया है, पर कुछ न पता चला है,
कोई भी नहीं जानता तुम गए कहाँ खो गए कहाँ ?

गावों से मैंने पूछा गलियों से मैंने पूछा,
हर एक साथी से पूछा, सहेलियों से मैंने पूछा
किसी ने ना दिया पता, तुम गए कहाँ खो गए कहाँ ?

किसी का आँगन रोता है, किसी माँ का दिल रोता है,
कहाँ गया मेरा लाल, दुःख तो सबको होता है
कोई तो आखिर दे बता, तुम गए कहाँ, खो गए कहाँ ?

ये पथराई सी आँखें, तेरा अब भी रास्ता देखे,
जाने कब लौट के आओ तुम और ख़ुशी के आंसूं ढलके
देखूं तेरा अब भी रास्ता, तुम गए कहाँ खो गए कहाँ ?

Photo by Kat Jayne from Pexels

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About the author

Gaurav

मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें, तुम अच्छा सोचते तो ऐसा लिखती, तुम और भी अच्छा सोचते तो मै वैसा लिखती. तुम इस बात को ऐसे कहते, तुम उस बात को वैसे कहते.... मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें....

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