Inspirational Patriotic Poem Song

Back to the roots

Written by Gaurav

” भले ही हम रुपये-पैसे की चाह में अपने देश, अपनी धरती से कितने ही दूर क्यों न चले जाए, हम अपने आप को इस मिट्टी से जुड़ा ही पाएंगे और जिस वक़्त ये बुलाती है तो फिर इंसान दुनिया के किसी भी कोने में हो, वो अपने घर को ज़रूर लौटता है ठीक उसी तरह अगर ‘सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाये तो उसे भूला नहीं कहते ”

‘अपने देश से बिछड़ के हम दूर कहाँ तक जायेंगे,
अपनी धरती की बात अलग हम लौट के वापस आयेंगे’

हवा के झोंके में उड़कर, मेरे देश की मिटटी आई है,
तुम आये तो घर की याद आई है,
तुम आये तो मुझे मेरे घर की याद आई है

वो गाँव गलियां सारी, वो खेत और फुलवारी,
वो आम के पेड़ का झूला, वो झोपड़ी मेरी प्यारी,

जब बिछड़ गए थे हम, तो हुआ था हमको भी गम,
आज पुरानी वही कहानी वक़्त ने दोहराई है
तुम आये तो घर की याद आई है,
तुम आये तो मुझे मेरे घर की याद आई है

‘दूर रहके ये जाना जुदाई चीज़ है क्या,
एक एक पल लगता साल मुझे, वक़्त काटे नहीं कटता था’

अपनों से अपना यार गया, दिल से तो कोई दिलदार गया,
रोई सबकी आँखें जब इस पार से मै उस पार गया,
एक दर्द था दिल में ऐसा, क्या बयाँ करू था कैसा,
मेरे वतन की मिटटी ने, फिर यादें वो महकायी है

तुम आये तो घर की याद आई है,
तुम आये तो मुझे मेरे घर की याद आई है

‘उन्हें कैसे भुला दूँ मै कि जिनका खून है मुझमे,
जुदा रहना बड़ा मुश्किल इसे समझाऊँ भी कैसे’

उस वक़्त पता न कुछ मुझको, एहसास भी कैसा होता था,
जब याद सभी की आती थी, मै छुप छुप कर के रोता था,
बस बुझा बुझा रहता मन, थम सी गयी थी धड़कन,
लगता है जैसे आज मुझे खुशियों की घड़ियाँ आई है

तुम आये तो घर की याद आई है,
तुम आये तो मुझे मेरे घर की याद आई है

Photo by Suket Dedhia from Pexels

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About the author

Gaurav

मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें, तुम अच्छा सोचते तो ऐसा लिखती, तुम और भी अच्छा सोचते तो मै वैसा लिखती. तुम इस बात को ऐसे कहते, तुम उस बात को वैसे कहते.... मै और मेरी कलम अक्सर ये बातें करतें....

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