नींदें तो चुरा ली मेरी अब, क्या चैन चुराने आये हो,
बोलो तो आखिर तुम कितना, हमें और सताने आये हो ?
अब तो रातों में चैन कहाँ, बस ख्वाब तुम्हारे रहते हैं,
दिन भर सोचा करते तुमको, भले दूर तुमसे रहते है
क्या आज मुझे फिर से तुम अपने पास बुलाने आये हो,
बोलो तो आखिर तुम कितना, हमें और सताने आये हो ?
दिल कहता है इतना मुझको, तुमसे बस दिलबर कहना है,
तुम दूर नही बस पास रहो, हमें सुख दुःख मिलकर सहना है
क्या यही दिलासा आज मुझे तुम फिर से दिलाने आये हो,
बोलो तो आखिर तुम कितना, हमें और सताने आये हो ?
तेरी चाहत में तो हमने, खुद तुमसे रिश्ता जोड़ दिया,
पर तुमने दुनिया के डर से, क्यों मुझसे नाता तोड़ लिया
वो बातें सारी झूठीं थी, क्या ये समझाने आये हो,
बोलो तो आखिर तुम कितना, हमें और सताने आये हो ?
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